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IAs exam ethic questions case study

Qst for  Mains paper 4 Ethics Case Study ************  प्रश्न . आप किसी ज़िले में ज़िलाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। विश्वसनीय सूत्रों से आपको यह जानकारी मिलती है कि आपके कार्यक्षेत्र के अंतर्गत किसी गाँव में सामूहिक रूप से बाल-विवाह का आयोजन होने वाला है। बाल-विवाह आयोजित कराने में समाज के कुछ प्रतिष्ठित एवं राजनीतिक पहुँच रखने वाले लोगों के साथ कुछ गरीब एवं लाचार लोग भी शामिल हैं। पूर्व में भी ऐसी घटनाएँ हुईं थीं जिन्हें रोकने में असफल होने पर प्रशासनिक ईकाइयों की काफी आलोचना की गई थी। ध्यातव्य है कि इस गाँव की पृष्ठभूमि ऐसी है कि छोटी-छोटी बातों पर भी उग्र व हिंसक प्रदर्शन करने लगते हैं। इस घटना को रोकने के लिये आपके पास कौन-कौन से विकल्प हैं?  उत्तर . उपरोक्त घटना के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों पर विचार किया जा सकता है- 1. घटना के विश्लेषण से यह ज्ञात होता है कि यह दो व्यक्तियों के अधिकारों (मानवाधिकार) के उल्लंघन का मामला है, जो कि कानूनी रूप से भी स्वीकृत नहीं है। अतः बाल-विवाह के आयोजन को रोकना ही हमारा प्राथमिक उद्देश्य होगा। अतः इस परिस्थिति में ‘नैतिक अनुनय...

Ias preparation

मेरे आईएएस की तैयारी करने वाले मित्र अवश्य पढ़े !!! सोलह, सत्रह साल की छोटी सी उम्र मे गावं की पगडंडीयों से उठकर जब एक लड़की/ लड़का खड़खड़ाती हुई बस में अपनें हौसलों के उड़ान के साथ बैठता है तब उसके दिमाग में बत्तियां जलती है वो बत्तियां लाल/ नीली होती हैं !! मेरे तमाम आईएएस की तैयारी करनें वाले मित्रो के लिए !! आज मायूस है तू, आज डरा हुआ है तू आखिर क्या मायूस होना जीत है? क्या डर के खामोश बैठ जाना जीत है? अरे तू कभी खूद्दार हुआ करता था अरे तू कभी रात-रात पढाई करता रहता था फिर आज ये डर कैसा ये मायूसी कैसी क्या भूल गया वो पल जब तुमने घर से बैग उठाया था अकेले दिल्ली जानें को; क्या बोला था दोस्त को, क्या बोला था जलने वालों को अरे उस वक्त को याद कर जब तू अलग था अरे उस वक्त को याद कर जब तू ट्रेन में बैठा था अरे उस मुसाफिर को याद कर जिसे आईएएस बनने की ट्रेन में बोला था ! याद आ गये ना वो दिन जब सपनों को इज्जत माना जाता था याद आ गये ना वो दिन जब दोस्त को पढाई के बहाने ना बोला जाता था ! याद कर वो दिन जब अकेले में किसी को कहा था कि आईएएस बनूंगा ! क्यूं चुप है अब,क्यूं सोया ...
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Article 370

1947 में देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने कश्मीर के प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्ला को अनुच्छेद 370 तैयार करने के लिए अंबेडकर से सलाह लेने को कहा। अंबेडकर इसके लिए राजी नहीं हुए तब शेख अब्दुल्ला ने यह ड्राफ्ट तैयार किया। वह इस अनुच्छेद को स्थायी तौर पर लागू करना चाहते थे, लेकिन केंद्र ने नहीं माना। ये हैं मुख्य प्रावधान -अनुच्छेद 370 के अनुसार, भारतीय संसद को केवल रक्षा, विदेश, वित्त व संचार मामलों में कानून बनाने का अधिकार है। -अन्य कानूनों को लेकर राज्य सरकार से अनुमोदन लेना जरूरी है। -भारतीय संसद राज्य की सीमाएं घटा-बढ़ा नहीं सकती है। -तिरंगे के अलावा जम्मू-कश्मीर का अपना अलग झंडा है। -भारत के दूसरे राज्यों के लोग इस राज्य में भूमि नहीं खरीद सकते। -वहां के लोगों के पास दोहरी नागरिकता है। -विधानसभा का कार्यकाल भी छह वर्ष का है। -शिक्षा व सूचना का अधिकार जैसे कानून और सीबीआइ, कैग जैसी एजेंसियां भी यहां लागू नहीं होती।

अनुच्छेद 35A

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  We the citizens नामक एनजीओ ने 2014 में सुप्रीम कोर्ट को एक याचिका लगाई जो जम्मू और कश्मीर में अनुच्छेद 35A से संबंधित था 2 साल के बाद मोदी सरकार ने न्यायिक डिसीजन करने का याचिका दायर की। उसके बाद से ही 35 A का बहस बहुत चर्चित हो गया सबसे पहले जानते हैं 35A अनुच्छेद क्या बताता है??? जम्मू कश्मीर की विधानसभा को यह  अधिकार देता है कि वह स्थायी नागरिक की परिभाषा तय कर सकें और उंहें चिन्हित कर विभिन्न विशेषाधिकार भी दे सके। भारत के किसी कानून को नहीं मानने यह प्रावधान है दूसरे शब्दों में भारत के किसी भी नागरिक को जम्मू-कश्मीर में वहां की नागरिकता नहीं ले सकता वही जम्मू कश्मीर के नागरिक अपने राज्य के अतिरिक्त दूसरे राज्यों में भी नागरिकता बन सकते हैं 35A जिसका जिक्र किसी संविधान कि किसी भी किताबें नहीं मिलता हालांकि संविधान में 35 a( स्मॉलर a) जरूर है लेकिन इसका जम्मू-कश्मीर से कोई सीधा संबंध नहीं है आज तक जितना भी संशोधन किताबों में मिलता है परंतु अनुच्छेद 35A संविधान के मुख्य भाग में नहीं बल्कि परिशिष्ट( अपेंडिक्स) में शामिल किया गया है ताकि लोगों को इसकी जानक...

समाज और अर्थव्यवस्था== मैक्स वेबर

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9                  समाज और अर्थव्यवस्था~~ मैक्स वेबर Max Weber (1897) Definition of Sociology:- समाजशास्त्र (जिस अर्थ में यह बेहद अस्पष्ट शब्द यहाँ प्रयोग किया जाता है) एक ऐसा विज्ञान है जो सामाजिक क्रिया की व्याख्यात्मक समझ का प्रयास करता है ताकि उसके पाठ्यक्रम और प्रभावों के कारणों का स्पष्टीकरण आ सके। "कार्रवाई" में सभी मानव व्यवहार शामिल हैं और जब तक अभिनय व्यक्ति इसे एक व्यक्तिपरक अर्थ को जोड़ता है। इस अर्थ में कार्रवाई या तो अति या विशुद्ध रूप से आवक या व्यक्तिपरक हो सकती है; इसमें स्थिति में सकारात्मक हस्तक्षेप हो सकता है, या जानबूझकर इस तरह के हस्तक्षेप से परहेज किया जा सकता है या स्थिति में सक्रिय रूप से स्वीकार्य हो सकता है। कार्य सामाजिक रूप से है, जैसा कि अभिनय व्यक्ति (या व्यक्ति) द्वारा उस व्यक्ति के साथ जुड़ा व्यक्तिपरक अर्थ के आधार पर होता है, यह दूसरों के व्यवहार के बारे में बताता है और उसके माध्यम से उसके पाठ्यक्रम में उन्मुख होता है। समाजशास्त्र की मेथोडॉलॉजिकल फाउंडेशन 1. "अर्थ" दो ...
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एक कदम ऊंचाई की तरफ महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी हायर एजुकेशन के मामले में बिहार बहुत पीछे था जिस के संदर्भ में सांसद अधिनियम के अधीन महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना की गई(2016) इस विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति महोदय डॉ अरविंद अग्रवाल जी हैं जो भारत की एक बड़े समाजशास्त्री के रूप में भी जाने जाते। आज पूरे चंपारण वासियों को इस विश्वविद्यालय के खुलने के साथ-साथ इतने योग्य कुलपति महोदय साथ ही शिक्षक इस विश्वविद्यालय के छात्रों की भविष्य की मार्गदर्शन देने के लिए विभिन्न विभिन्न स्थानों से पधारे हुए हैं मैं तहे दिल से उन सभी प्रिय शिक्षक को स्वागत करता हूं जिन्होंने चंपारण की धरती पर आने के प्रति रुचि प्रकट की। विश्व विद्यालय अपने नियत समय पर भूमि  ना उपलब्ध होने से जिला स्कूल के कैंपस से अपने छात्रों को हायर एजुकेशन प्रदान कर रही है परंतु(2017) के नए बैच के विद्यार्थियों को इस बार निराश पूर्ण होना स्वभाविक है क्योंकि भूमि उपलब्ध ना होने के संदर्भ में यह सब चालू नहीं हो पाएगा संभवता। राज्य सरकारी अभी तक ना कोई भूमि उपलब्ध करा रही है नहीं कुछ इस पर...