सोच बदलो इस्लाम धर्म में फतवा (अरबी)मजहब के जानकार व्यक्ति द्वारा दिया गया राय है फतवा शब्द से तात्पर्य मुस्लिम लोग के मुताबिक किसी निर्णय पर नोटिफिकेशन जारी करना दो शब्द में राय कहते हैं यह कोई कानून नहीं है जिस पर डरना चाहिए यह एक राय है और कोई भी फतवा नहीं दे सकता जब तक उसे इस्लाम की पूरी जानकारी नहीं है फतवा देने के लिए एक अथॉरिटी होती है जो पूरी तरह सोच विचार कर अपना निर्णय देती है अगर फतवा को जबरदस्ती से लागू कराया जाता है तो वह गलत है क्योंकि इस्लाम जोर जबरदस्ती की इजाजत खुद ही नहीं देता। भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है जहां अखंडता एकता सद्भावना की पुष्प खिलती है जिस पुष्प से भारत  सौरभ सा एकता के बंधन में बंधे रहते हैं भारत धर्मनिरपेक्ष होने के साथ-साथ प्रत्येक धर्म में धर्मगुरुओं की प्रधानता देखने को मिलती है लोगों की अपने धर्मगुरुओं से अपने समस्या का निदान के सहयोग के लिए जाते हैं परंतु आज के संदर्भ में देखें फतवा का स्वरुप पर दिया जा रहा है हाल ही के दिनों में असम में 46 मौलानाओं ने मिलकर सिंगर नाहिद आफरीं की म्यूज़िकल नाइट के खिलाफ पर्चे बंटवाए हैं. वे चाहते हैं कि लोग नाहिद के कार्यक्रम में न जाएं. क्योंकि उनके मुताबिक ये इस्लाम के खिलाफ है! ये पर्चे असम के होजाई और नागाओं में 14 मार्च को बांटे गए. इनमें लिखा है ‘म्यूज़िकल नाइट जैसे कार्यक्रम शरिया के खिलाफ हैं. अगर मस्जिदों, मदरसों, ईदगाहों के मैदान में ऐसे कार्यक्रम होते हैं तो हमारी आने वाली नस्लें अल्लाह के गुस्से का शिकार बनेंगी.’ यहां 25 मार्च को असम के लंका में होने वाली म्यूज़िकल नाइट के बारे में बात हो रही है. अाफरीं इसमें गाने वाली हैं. ये कार्यक्रम लंका के उदाली सोनाई बीबी कॉलेज में होगा. कल खबरें आई थीं कि नाहिद के खिलाफ फतवा जारी हुआ है. लेकिन फिलहाल सिर्फ पर्चे बांटने की बात सामने आई है.;नाहिद ने कहा कि  ‘मुझे इससे चोट पहुंची है. लेकिन कई मुस्लिम गायकों ने मुझे गाना कभी न छोड़ने की प्रेरणा दी है. मैं गाना कभी नहीं छोड़ूंगी’ यह पहली बार नहीं है कि आफरीं को निशाने पर लिया गया है. इंडियन आइडल जूनियर के पूरे होने से ठीक पहले सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने आफरीं को बांग्लादेशी बताया था. इसके बाद सोशल मीडिया पर कई लोग आफरीं के बचाव में सामने आए. नाहिद की ही तरह कुछ दिनों पहले कर्नाटक के शिमोगा में एक और मुस्लिम सिंगर को सोशल मीडिया पर निशाना बनाया गया था सुहाना सईद ने कन्नड़ भाषा के सिंगिंग रियलिटी शो में एक हिंदू धार्मिक गाना गाया था. इस पर ये कहा गया था कि एक मुस्लिम लड़की का ‘हिंदू गाने’ गाना पूरे मुस्लिम समुदाय का अपमान है. यहां तक लिखा गया कि मर्दों के सामने गाना गाकर इसने मुस्लिम समुदाय पर कालिख पोती है. इस्लाम में गायकी को गलत शब्द माना  गया है कई-कई बार साफ किया जा चुका है कि इस तरह की राय या फतवे धर्म की जगह एक खास आइडियॉलजी के तहत होती हैं. फिर भी लोगों की ज़िंदगी को काबू करने की कोशिशें होती रहती हैं. लेकिन हर बार आने वाले इन मामलों को ‘होता है’ कहकर किनारे नहीं किया जाना चाहिए. इसकी मुखालफत भी होनी चाहिए और इस तरह की हरकत से जुड़े लोगों पर ज़रूरी कार्रवाई भी हो. आज आज के आधुनिक समय में महिलाओं को फतवा से जोड़ने का अधिकार किसने दिया हमारे भारत के संविधान में महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान किए गए किसी का अधिकार नहीं है कि कोई गलत फतवा जारी करें एक एक बड़े समाजशास्त्री ने यह कहा था कि "Women are not born but made"
आज समय की मांग है महिलाओं की सारी अधिकार दे दी जाए अन्यथा आपके परिवार पर महिलाएं भी आप को सम्मान देना जानती हैं मत भूलिए यह वही है जो कभी आपके मां का स्वरूप में प्रेम की शिक्षा देती हैं और वही आपका व्यवहार अगर गलत हुआ तो झांसी की रानी बनने में भी समय नहीं लगेग।

सौरभ कुमार


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